Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
इह भव्यो भवान्साधो विचारपरया धिया ।
त्वयाधुनैव तेनायं संसारः प्रविचार्यते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी,
नैकविधप्राणियोके समूह के अत्यन्त वेगवूर्वक ऊपर, नीचे ओर मध्यलोक की गतियो से होनेवाले
निरन्तर आवर्तन एवं उनसे जनित उद्वेगो के स्वरूप का परिज्ञान रख रहे ब्रह्मा भी अखिन्न बुद्धि तथा
सममन होकर अपने दो परार्धवर्षपर्यन्त अतिविस्तृत आयुष्य को बिताते हैं