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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

भवानिव विचार्यादौ संसारमतिकान्तया । मत्या यो गाहते लोको नेहासौ परिमज्जति ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌ श्रीहरि यद्यपि नित्यमुक्त हैँ तथापि जरा, मरण, युद्ध आदि द्वन्दो की युद्धलीला से इस संसारमण्डल में बहुत काल तक संचरण करते हैं