Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 24
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हिन्दी अर्थ
जीवन्मुक्त होकर ही सहस्रमुख, नागराज शेष पृथ्वी को धारण करते हैं, सूर्य
भगवान् दिवसों की परम्पराओं का निर्माण करते हैं, यमराज धमधिर्म विचारपूर्वक लोगों का नियमन
करते हैं