Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 23
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
भद्र श्रीरामजी, समस्त भुवनों में अत्यन्त मान्य, समर्थ यह
विश्वामित्र महर्षि यद्यपि जीवन्मुक्त मानस हैं, तथापि वेदशास्त्र मे विहित यज्ञादि क्रियाओं का अनुष्ठान
किया करते हैं