Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 22
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हिन्दी अर्थ
महामुनि नारदजी यद्यपि
मुक्त स्वभाव हैं, तथापि इस जगत्रूपी जंगल के खण्ड में कलह कौतुक को प्रवृत्त करनेवाली शान्त
बुद्धि से यत्र तत्र विचरण करते हैं