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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 26

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

विचित्र शोक, मोह अनर्थो के उत्पादक तथा पुत्र, स्त्री, धन-सम्पत्तिआदि का संग्रहकर युद्ध, वध, बन्धन आदि आचारो से युक्त भी इन सांसारिक राज्यादि व्यवहारो मे संस्थित कुछ पुरुष भीतर शान्ति से समन्वित यानी मुक्त रहते हैं और कुछ मूढ तो शिला के सदुश रहते हैं, यानी अज्ञान में फँसे रहते हैं