Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 28
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हिन्दी अर्थ
कुछ तत्त्वज्ञ महात्मा
आत्मज्ञान प्राप्तकर राज्यकर्म में ही छत्र, चामर आदि से रक्षित होकर रहते हैं । जैसे जनक, श्यति,
मान्धाता, सगर आदि