Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 33
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हिन्दी अर्थ
यदि शंका हो कि जितने सात्विक है उन सबमें देवता अधिक सात्विक है, अतः जिनकी ज्ञान ओर
एश्वर्य शक्ति स्वभावतः ही अभिव्यक्त होती है, ऐसी देवयोनियों मे मूर्खो की संभावना कैसे हो सकती
है ? तो यह शंका युक्त नहीं है, क्योकि सर्वशक्ति इश्वर की सर्वभाव से सर्वत्र सव प्रकार से सदा
स्थिति होने से तथा स्वस्वरूप आत्मा में स्वप्नादि अवस्थाओं में सैकड़ों असंभावित वस्तुओं का भी
दर्शन होने के कारण कहीं पर किसी की भी असंभावना नहीं करनी चाहिए ऐसा कहते है ।
जिसका अत्यन्त व्यापक स्वरूप है, ऐसे सर्वस्वरूप आत्मा में सब कुछ सर्वभाव से सर्वत्र सब प्रकार
से सदा ही सम्भावित हो सकता हे