Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 34
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हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त अर्थ को ही स्पष्टरूप से कहते हैं।
विधि की नियति, अनन्त कार्यो के आरम्भ में निरत है और विचित्र है, अत: संनिवेशांश के वैचित्र्य
से सब कुछ सब जगह दिखाई पडता है