Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 36

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जहाँ पर अत्यन्त असंभावित भी वस्तु और अवस्तु दोनों एक दूसरे के भीतर संभावित हो जाती हैं, वहाँ पर दूसरा क्या असंभावित हो सकता है ? इस आशय से कहते हैं। अवस्तु में भी भीतर वस्तु रहती है, जैसे बालू में सुवर्णं तथा वस्तु में भी अवस्तु रहती है, जैसे सुवर्ण के कणों के भीतर मालिन्य