Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 40
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हिन्दी अर्थ
जिनका विनाश कभी भी संभावित नहीं था, ऐसे सुदृढ़ पदार्थ भी कल्प के अन्त में क्षय
को प्राप्त हुए दिखाई पडते हैं । जैसे चन्द्र, सूर्य, पृथ्वी, समुद्र, देवता आदि