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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 41

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

असंभावित का भी संभव है, इसका प्रासंगिक जो उपादान हुआ, उसका भी प्रकृत ही फल है, यह दिखलाते हुए उपसंहार करते है । हे महाबाहो, इस प्रकार के भाव-अभावात्मक संसृतिक्रम को देख रहे आप हर्ष, अमर्षं विषाद और अभिलाषाओं का परित्याग कर समभाव को प्राप्त हो जाइए