Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 43
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हिन्दी अर्थ
यदि शंका हो कि ऐसा होने पर विदेह मुक्ति में भी फिर संसार प्राप्ति की संभावना हो जायेगी, तो
इस पर कहते है।
हे राघव, मुक्ति हो जाने पर फिर इस संसार में किसी प्रकार जीवत्व की प्राप्ति नहीं हो सकती,
क्योंकि करोड़ों मनुष्य असंसारी आत्मा के विवेक की यानी तत्त्वज्ञान की अप्रवृत्ति में ही अज्ञान-दशा में
अत्यन्त असंभावित करोड़ों अनर्थो की संभावनारूपी भ्रम में निमग्न रहते हैं, मुक्ति में नहीं, क्योकि
संसारनिमज्जन के हेतु अज्ञान का विनाश हो चुका हे