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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 48

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, इसलिए आप भी वैराग्य और विवेक से उदित धीरबुद्धि से समन्वित मि ट्टी के ढेले में पत्थर और कांचन में समदृष्टि तथा जीवन्मुक्त होकर विहार कीजिये