Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 47
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हिन्दी अर्थ
यदि शंका हो कि पहले के महात्माओं की जीवन्मुक्ति का संभव होने पर भी वर्तमान काल के
महात्माओं की जीवन्मुक्ति का संभव नहीं है, तो इस पर कहते हैँ ।
राग से शून्य, अभिनिवेशों से रहित तथा उत्तम मेघा से सम्पन्न सुहोत्र, जनक इत्यादि की नाई इस
वर्तमान काल में भी अनेक जीवन्मुक्त विद्यमान हैं