Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 50
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हिन्दी अर्थ
उसमें पहले सदेहमुक्ति और विदेह मुक्ति इन दोनों मुक्तियों में घटनेवाले मुक्ति शब्द के अर्थ का
निर्वचन करते हैं।
हे पापशून्य आकृतिवाले श्रीरामजी, पदार्थों के (विषयों के) असंग से जो मन की शान्ति होती है,
वह विमुक्तता यानी मुक्ति शब्दार्थ है । विमुक्तता देह के अस्तित्व और नास्तित्व दोनों अवस्थाओं में
होती है