Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 51
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हिन्दी अर्थ
भद्र उसमें स्नेह बन्धन का विनाश ही यानी देहादि में आत्मस्वरूपत्व के विभ्रम से हुई
प्रीति का विनाश ही उत्तम कैवल्य (मुक्ति) है, ऐसा तत्त्वज्ञ विद्वान् कहते हैं । वह कैवल्य देह की सत्ता
रहे चाहे न रहे, दोनों अवस्थाओं में होता है