Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 52
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हिन्दी अर्थ
जो विद्वान् विषय-स्नेह से रहित होकर जीता है,
वह जीवन्मुक्त कहलाता है, जो विषय स्नेह से समन्वित होकर जीता है, वह बद्ध कहलाता है और इन
दोनों से जो परे हैं, वह तीसरा मुक्त कहलाता है