Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 53
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हिन्दी अर्थ
भद्र, मोक्ष के लिए शम, दम आदि चार साधनों
के मध्य में यत्न के द्वारा पूर्वपूर्व की सिद्धि हो जाने पर उत्तरोत्तर पर विजय पाने के लिए युक्तिपूर्वक
(प्रमाणों का तात्पर्य और प्रमेय के स्वरूप का अवधारण करने के लिए अनुकूल जो तर्क है, तत्पूर्वक)
प्रयत्न करना चाहिए । जो युक्तिपूर्वक प्रयत्न से वर्जित है, ऐसे पुरुष के लिए गाय का खुर मात्र प्रदेश भी
अलंघ्य हो जाता है