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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 54

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 54

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

तथोक्त युक्तिपूर्वक प्रयत्न का अनुष्ठान वहाँ तक करना चाहिए, जहाँ तक कि आत्मा के स्वरूप का अवधारण न हो जाय, जब कि आत्मा का अध्यवसान हुआ हो, तब सहसरा बीच में ही विरक्ति से प्रयत्न का उपराम कर उसे (आत्मा को) पुनः अनर्थ के वश में नहीं कर देना चाहिए, ऐसा कहते हैं। केवल मोह का अवलम्बन कर अध्यवसाय के न होने पर प्रयत्न के अनादर से असीम स्वरूपवाले आत्मा को दुःख के लिए परवश नहीं करना चाहिए