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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 77, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

अनुबन्धपरे जन्तावसंसक्तेन चेतसा । भक्ते भक्तसमाचारः शठे शठ इव स्थितः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रज्ञारूपी बड़ी नौका ओर विवेकरूपी नाविक के रहने पर यदि इस संसार रूपी सागर से जो पार नहीं हुआ, तो उस पुरुष को धिक्कार है