Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 77, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
बालो बालेषु वृद्धेषु वृद्धो धीरेषु धैर्यवान् ।
युवा यौवनवृत्तेषु दुःखितेष्वनु दुःखितः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, अपारावार यानी असीम संसार समुद्र का आत्मतत्त्व के दर्शन से बाध कर उसको
चारों ओर से प्रमेय ब्रह्मस्वरूप बनाकर जो प्रवेश करता हे यानी प्रत्यग् आत्मा को भी जो तद्रूप प्राप्त
करता है, वही पुरुष कहा जाता है