Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
पूरकादिनिजायामादृढाभ्यासादखेदजात् ।
एकान्तध्यानसंयोगात्प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वज्ञ
महानुभाव ने जब समस्त जगत की स्वरूपभूत अद्वितीय आत्मरूप यथार्थ वस्तु का भली प्रकार परिज्ञान
कर लिया, तब उसका मन सांसारिक सुख ओर दुःख एवं दुःखकारणों की निवृत्ति-स्वरूप मुक्ति इन
दोनों के बीच में कहीं भी कार्पण्य से युक्त नहीं होता