Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
ओंकारोच्चारणप्रान्तशब्दतत्त्वानुभावनात् ।
सुषुप्ते संविदो जाते प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्यक्-ज्ञानरूपी अग्नि से जिसके
सन्देहरूपी जाल (पिंजडे) विनष्ट हो गये हैं, उस महात्मा का चित्तरूपी पक्षी निःसंशय पर्याप्त रूप से
उड़ जाता हे, ऐसी स्थिति में तत्त्वज्ञ के मन में कार्पण्य की संभावना ही नहीं है