Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
इयत्तया परिच्छिन्ने देहे यद्वक्षसोऽन्तरम् ।
हेयं तद्धृदयं विद्धि तनावेकतटे स्थितम् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें प्राणी अविरत मरते ओर उत्पन्न होते हैं, ऐसी जगत् की स्थिति में कहाँ, किस
प्रकार ओर कोन यह सुखिता ओर दुःखिता होगी ? “किम्' शब्द का तीन बार विभिन्न रूप से उपयोग
इसलिए किया गया है कि देश-काल से, प्रकार से ओर स्वरूप से असंभावितत्व का लाभ हो