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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

चित्तचित्तपरिस्पन्दपक्षयोरेकसंक्षये । स्वयं गुणगुणी स्थित्वा नश्यतो द्वौ न संशयः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

तत्त्ववित्‌ भविष्य की न अपेक्षा करता है, न वर्तमान मेँ अवस्थिति यानी समासक्ति करता है, न भूतकालीनवस्तु का स्मरण करता है, और सब कुछ करता भी है