Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verses 37–38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verses 37–38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 37
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, संवित् ही सभी प्राणियों का हृदय कहा जाता है, न कि जड़ ओर जीर्णं पत्थर के
सदुश देह के अवयव का एक अंश हृदय कहा जाता है