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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 41

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

वैराग्यरूपी लांछन से समन्तात्‌ लांछित यानी संसारासक्ति से वर्जित तथा अभ्यास से दृढता को प्राप्त प्राणायाम वासना के अनुसार,सफल होता है यानी जिस समय जैसी जेसी वासनाएँ होती है,उस समय उन-उन वासनाओं का निरोध करके सफल होता है अथवा मुमुक्षा की वासना होने पर मोक्षरूप फल से और भोग की वासना होने पर तत्‌-तत्‌ विचित्र फलभोग सिद्धिरूप फल से सफल होता है