Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 43
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हिन्दी अर्थ
“जिह्या55क्रम्य घण्टिकाम्” यह जो पहले कहा गया था, उसमें उपाय कहते हैं।
पुनः-पुनः चिरकालिक अभ्यास से यदि जिह्लप्रान्त के द्वारा घण्टिका आक्रान्त हो जाय, तो उससे
प्राण अधिक गति नहीं कर सकता