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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 44

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 44

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

ये जो समाधिभेद बतलाये गये हैं, उनका तत्‌-तत्‌ सिद्धि-फलों में विकल्पों का बाहुल्य होने पर भी निष्काम पुरुष के लिए परम विश्रान्तिरूप फल में उनकी विकल्पस्वरूपता का अवसर नहीं है, ऐसा कहते हैं। यद्यपि ये समाधियाँ विकल्प प्रचुर है, तथापि निष्काम पुरुष के प्रति अपने अभ्यास के कारण परम विश्रान्ति के लिए झटिति (चटपट) विकल्प अभावरूपता को प्राप्त हो जाती है