Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 48
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हिन्दी अर्थ
चूँकि प्राणवायु का स्पन्दन मन का स्वरूप है और उससे संसाररूपी भ्रम
उत्पन्न होता है, इसलिए तथोक्त अभ्यास से प्राण स्पन्दन का ही विनाश हो जाने पर संसाररूप ज्वर
खण्डित हो जाता है यानी चिकित्सित हो जाता है