Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 49
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, प्राणी का विकल्पांश विनष्ट हो
जाने पर केवल वह पद (ब्रह्मपद) अवशिष्ट रह जाता है, जिस पद से अनैकविधकल्पनाओं से समन्वित
शब्द निवृत्त हो जाते हैं