Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 53
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हिन्दी अर्थ
फलमत उपपत्तेः“ (इष्ट, अनिष्ट आदि कर्मो का फल इश्वर से प्राप्त होता है क्योकि इसी अर्थ में
युक्ति है) इस न्याय से तथा विचित्र कर्मफलों के उदय और क्षय के प्रति निमित्तरूप होने से भी उसका
परिचय करना चाहिए, ऐसा कहते है।
कल्पवृक्ष स्वरूप उसी आत्मा से ये अनेक संसारफलों की पंक्तियाँ, जो अनेक प्रकार के रसों से
परिपूर्ण ह, निरन्तर उत्पन्न ओर विनष्ट होती हैं