Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 54
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हिन्दी अर्थ
उसका परिचय होने पर पुरुषार्थ सिद्धि को बतला रहे महाराज वसिष्ठ प्रकृत विषय का उपसंहार
करते हैं।
हे भद्र श्रीरामजी, निखिल सीमाओं के अन्तभूत उस पद का अवलम्बन कर जो महात्मा स्थित
रहता है, वह निश्चलबुद्धि, तत्त्वज्ञ ओर जीवन्मुक्त कहलाता है