Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 8, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अन्ये ऊचुः ।
बुद्ध्वाप्यत्यन्तवैरस्यं यः पदार्थेषु दुर्मतिः ।
बध्नाति भावनां भूयो नरो नासौ स गर्दभः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
औरों ने कहा : जो दुर्बद्धि पुरुष भोग्य विषयों में अत्यन्त नीरसता को जानकर भी उनमें भोग
तृष्णा करता है, वह नर नहीं है, वह गधा हे