Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 80, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
रूपालोकमनस्काराः परस्परमसङ्गिनः ।
संपन्ना इव लक्ष्यन्ते वदनादर्शबिम्ववत् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़े-से-बड़े पदार्थ हैं, उन सबसे भी बड़ा ब्रह्म है। माया से नट की नाईं अपनी आत्मा में ही बढ़े हुए
आकार से युक्त यह जगत्-रूप दृश्य अवस्थित है। आत्मा के ज्ञान से जागतिक द्वित्व तत्क्षण विलीन
हो जाता है अतः आप अपने से ही आत्मस्वरूप हो जाइए