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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 80, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

स्वमनोमननं तन्तुर्मनोभ्यासेन यत्नतः । विचाराच्छेदमायाति च्छिन्नैवाज्ञानभावना ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राघव, यह निखिल स्थावर ओर जंगमात्मकजगत्‌ निरतिशयानन्दात्मक चिदाकाशस्वरूप ही है, अतः सुख और दुःख की प्रसक्ति कहाँ होगी अर्थात्‌ कहीं नहीं होगी, इसलिए आप समस्त चिन्ता ज्वरो से निर्मुक्त हो जाइए