Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 80, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सर्वेषां चित्तमेवान्तरिन्द्रियाणां प्रबोधकम् ।
तदेव तस्मादुच्छेद्यं पिशाच इव मन्दिरात् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो महात्मा शुद्ध आत्मा का आलिगन कर अन्तःस्थ बुद्धि से सदा-सर्वदा अवस्थित
रहता है, उस तत्त्वज्ञ आत्माभिलाषी को कौन भोग बाँधने के लिए समर्थ हो सकते हैं ?