Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 80, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

मुधा पञ्चभिराकारैः किमन्तः परिवल्गसि । यस्त्वां स्वमिति जानाति तस्यैव परिवल्गसि ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे जल से निर्गत अथवा स्वल्प जल में स्थित मत्स्य को बगुले निगल जाते हैं, वैसे ही इस संसार में आशाओं मेँ निरत, मूढ, अज्ञानी ओर अविचारी पुरुष को दुःख निगल जाता हैं