Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 80, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
त्वद्वल्गनं मे कुमनो न मनागपि तुष्टये ।
मायामनःस्पन्द इव व्यर्थं वृत्तिषु दह्यसे ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी,
समस्त जगत् आत्मस्वरूप ही है, कहीं पर भी अविद्या नाम की कोई वस्तु है नहीं, इस प्रकार की दृष्टि
का अवलम्बन कर आप सम्यक् स्वरूपवाले होकर स्थित हो जाइए