Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 80, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
येनैव संख्या क्रियते येनैवाऽस्वाऽनुगम्यते ।
तदीयैः कर्मभिः क्षिप्रं प्राज्ञः क्रूरो निबध्यते ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
तब मुक्ति में क्या बच जाता है ? उसे बतलाते हैं।
इस मुक्ति में संकल्पांशों से विनिर्मुक्त, समस्त संवेद्यों से (विषयों से) वर्जित तथा केवल
स्वप्रकाशस्वभाव से ही चारों ओर प्रकाशमान केवल चिति ही बच जाती है, उससे अन्य कुछ भी नहीं
बचता