Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
निराभासमनाद्यन्तं पदं पावनमागतः ।
सौम्यः सर्वगतः सूक्ष्मः स्थित आत्मास्मि शाश्वतः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रकाश और रूप के साथ चित्त का सम्बन्ध ही नहीं है , इस विषय को दृष्टान्त से स्पष्ट करते हैं ।
जैसे वास्तव में परस्पर एक दूसरे से असंबद्ध मुख, दर्पण और प्रतिबिम्ब परस्पर एक दूसरे से
सम्बद्ध प्रतीत होते है, वैसे ही वास्तव में परस्पर एक दूसरे से असम्बद्ध रूप, प्रकाश ओर मन एक दूसरे
से सम्बद्ध प्रतीत होते हैं । चक्षु के द्वारा बाहर रूप का अवलोकन होता है और मन के द्वारा भीतर
संकल्पादि मनस्कार ज्ञात होते हे, यों भिन्न देशता होने के कारण वास्तव में उनका सम्बन्ध नहीं हो
सकता । यह भाव हे