Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
चित्तं भवतु मा वान्तर्म्रियतां स्थितिमेतु वा ।
को विचारणयार्थो में चिरं साम्योदितात्मनः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे दो काठ लाख से एक दूसरे से
श्लिष्ट हो जाते हैं, वैसे ही ये रूप, प्रकाश और संकल्प आदि मनरकार परस्पर चित्त की कल्पना से एक
दूसरे से संश्लिष्ट हो जाते हैं