Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 23
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हिन्दी अर्थ
हे चित्त, तुम शठ के
द्वारा दीर्घकाल तक अवरुद्ध मेरा सम्पूर्ण देहरूपी घर शम, दम, विचार, प्रबोध आदि साधुओं के संसर्ग
से वर्जित हुआ था