Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 24
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हिन्दी अर्थ
हे चित्त, प्रेत के सदृश आकारवाले जड तुम्हारे मनरूपी शठ के चले जाने पर
मेरा देहरूपी यह घर शम, दम आदि समस्त साधुओं के द्वारा सेवा करने योग्य हो गया