Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 30
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हिन्दी अर्थ
हे अज्ञानी गरीब चित्त, मैं आज तुमको
मारता नहीं हूँ यानी तुम्हारा वध नहीं करता, क्योकि तुम पहले से ही मर चुके हो, यह मैंने जान लिया
है । यही तुम्हारा वध है