Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 31
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हिन्दी अर्थ
हे चित्त, इतने काल तक तुम्हारा अस्तित्व (स्वरूपसत्ता) जीवित की
नाईं था, यह जानकर चिरकाल तक संसार रात्रिया में तुम्हारे साथ तादात्म्यभाव को प्राप्त हुआ था