Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verses 32–33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verses 32–33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 32
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हिन्दी अर्थ
चित्त निस्तत्त्व है, अतः: उसका अस्तित्व हो ही नहीं सकता- यह मैंने आज जान लिया, इसलिए
तुम्हारी आशा का परित्याग कर केवल अपने स्वरूपभूत आत्मा में स्थित रहता हूँ