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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 39

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

विचाररूपी मन्त्र से मन मर गया, चिन्ता मर गई और अहंकाररूपी राक्षस भी मर गया, अब समस्त विषमताओं से रहित तथा स्वस्थ होकर केवल मैं ही स्थित हूँ ॥ ३ ८॥ कौन मेरा मन हे ? कौन मेरी आशा है ओर कौन मेरा अहंकार है ? भाग्य से मेरा निरर्थक यह पोष्यवर्ग शेषरूप से विनष्ट हो गया