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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 47

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 47

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

मैं सर्वत्र समरूप, सर्वत्र व्यापक, सूक्ष्म और जगत्‌ को एकमात्र प्रकाशित करनेवाली सत्ता को भीतर से प्राप्त हुआ हूँ, ऐसे मद्रूप प्रत्यगात्मा को ही नमस्कार है